
LPG Cylinder Crisis Big Update: कई शहरों में खत्म हुआ गैस स्टॉक, जानें कब तक मिलेगी राहत
अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण राजधानी दिल्ली, यूपी और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत होने लगी है। गैस सिलेंडर भरवाने को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। लखनऊ समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
कई जगह घरेलू आपूर्ति तो अभी सामान्य है, लेकिन वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों को लेकर परेशानी बढ़ रही है। यह स्थिति इसलिए भी है कि लोग आशंका में पहले से ही गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे हैं। व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित होने से दिल्ली में 50 हजार से अधिक रेस्तरां, पब, बार और होटलों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं।
LPG Cylinder Crisis
LPG Cylinder Shortage: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और खबरों में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के दावे ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने भारत की एनर्जी सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण कई शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कमी देखी गई, जिससे होटलों में चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या घरेलू उपभोक्ताओं को भी फिर से लंबी कतारों में लगना होगा? आइए जानते हैं क्या है जमीनी हकीकत और कब कब इस सरकार में सिलेंडर के लिए लाइन लगाने की नौबत आई|
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lpg gas cylinder kab tak milega:राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी का कोटा 30% से बढ़ाकर 50% कर दिया जाएगा. इससे देशभर में अलग-अलग राज्यों में चरमराई होटल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा होगा. इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों को भी 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर रिफिल कराने को मिलेगा|
कब मिलेगा सिलिंडर?
सरकारी नियम के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में सिलिंडर बुक करने के बाद आपको 2 से 3 दिन में डिलीवरी हो जाता है। हालांकि सामान्य स्थिति में भी तकनीकी दिक्कत या मांग बढ़ने के चलते इसमें देरी भी हो जाती है। अब सवाल है कि युद्ध की परिस्थिति में आपको सिलिंडर मिलने में कितना समय लगेगा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने ये शिकायत की है कि उन्होंने बुकिंग करने के बाद भी एक हफ्ते बाद सिलिंडर डिलीवरी हो रहा है। कुछ लोगों ने ये भी कहा है कि उन्हें डिलीवरी होने में एक हफ्ते से भी ज्यादा का समय लग रहा है।
हालांकि मीडिया खबरों की मानें तो दूसरे मार्गों से एलएनजी गैस भारत पहुंच गई है। अब ये देखना होगा कि क्या इसकी पहुंच जरूरतमंद लोगों तक पहुंच पाती है। युुद्ध का सबसे ज्यादा असर एलपीजी पर इसलिए पड़ा है क्योंकि भारत ज्यादा से ज्यादा एलएनजी गैस मध्यपूर्व से लाता है।
किन्हें मिलेगा सीधा फायदा?
सरकार द्वारा बढ़ाए गए इस अतिरिक्त कोटे की सप्लाई मुख्य रूप से ‘प्रायोरिटी सेक्टर’ (प्राथमिकता वाले क्षेत्रों) को की जाएगी, जिनमें होटल, रेस्तरां वगैरह शामिल हैं.
- रेस्टोरेंट, ढाबे और होटल
- औद्योगिक कैंटीन और सब्सिडी वाली कैंटीन
- फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) और डेयरी यूनिट्स
- कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई)
- प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाला ‘फ्री ट्रेड एलपीजी’
होटलों के अलावा स्कूल-हॉस्पिटल और मजदूरों को राहत lpg cylinder kab tak milega
प्राथमिकता में रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी यूनिट, सरकारी सब्सिडी वाले कैंटीन, कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर शामिल हैं. साथ ही शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को भी प्राथमिकता दी गई है और कुल कमर्शियल एलपीजी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों को दिया जा रहा है. 50% आवंटन का लाभ केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा, जो सिटी गैस वितरण नेटवर्क से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन लेने के लिए तैयार होंगे और इसके लिए जरूरी कदम उठाएंगे.
राम रसोई करनी पड़ी बंद
अयोध्या में वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कमी के कारण राम नगरी में मंगलवार को नियमित शाम तीन बजे तक चलने वाली राम रसोई मंगलवार को दो बजे ही बंद करनी पड़ी। कई जगह मंदिरों ने लकड़ी और कोयले के उपयोग से भोजन पकाने का निर्णय लिया है। आल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर फेडरेशन (एआईएलडीएफ) के कार्यकारी अध्यक्ष पीएन सेठ के अनुसार यह दिक्कत कुछ दिन के लिए ही है।
क्यों अचानक बढ़ गई सिलेंडर की मांग?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. हालिया युद्ध के कारण समुद्र के रास्ते गैस लेकर आने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इस अनिश्चितता के चलते लोगों के मन में डर बैठ गया कि कहीं आने वाले समय में सिलेंडर मिलना बंद न हो जाए. इसी पैनिक की वजह से दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में गैस एजेंसियों पर कॉल्स और बुकिंग्स की बाढ़ आ गई. लोग एक एक्स्ट्रा सिलेंडर स्टॉक में रखने की कोशिश करने लगे, जिससे बाजार में अस्थायी कमी महसूस होने लगी है.
लागू हुआ 25 दिनों का गैप नियम
घबराहट में की जा रही ओवर बुकिंग’ और जमाखोरी को रोकने के लिए मोदी सरकार ने एक सख्त फैसला लिया है. अब घरेलू एलपीजी उपभोक्ता एक सिलेंडर मिलने के बाद अगले 25 दिनों तक दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे. पहले यह सीमा 21 दिनों की थी. पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि यह कदम किल्लत की वजह से नहीं, बल्कि आपूर्ति के समान वितरण के लिए उठाया गया है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि एक ही व्यक्ति सारा स्टॉक न दबा ले और हर घर तक सिलेंडर पहुंच सके|
LPG Cylinder Crisis एसेंशियल ऑफ कमोडिटी एक्ट लागू
सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) को लागू कर दिया है. इसके तहत घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता पर रखा गया है. सरकार ने साफ आदेश दिया है कि देश में जितनी भी गैस उपलब्ध है, उसका 100% हिस्सा पहले घरों और वाहनों (CNG) के लिए सुरक्षित किया जाएगा. यही कारण है कि होटलों और रेस्टोरेंट्स में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर की राशनिंग की जा रही है, ताकि आम आदमी की रसोई पर आंच न आए.
मोदी सरकार का ‘प्लान-बी’
जब खाड़ी देशों से सप्लाई बाधित हुई, तो मोदी सरकार ने अपना ‘प्लान-बी’ एक्टिव कर दिया. भारत ने अब ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और कनाडा जैसे देशों से एलपीजी और एलएनजी की अतिरिक्त खेप मंगाना शुरू कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, घरेलू उत्पादन में भी 10% का इजाफा किया गया है. रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी और अन्य सरकारी रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे अपनी पूरी क्षमता से एलपीजी का उत्पादन करें. सरकार का दावा है कि फिलहाल पैनिक करने की जरूरत नहीं है क्योंकि देश के पास पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है.
मोदी सरकार में कब-कब गैस के लिए लगीं कतारें?
मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में सीधे तौर पर गैस के लिए लंबी कतारें लगने की नौबत कम ही आई है, लेकिन कुछ मौके चुनौतीपूर्ण रहे हैं.
- मई 2016 में जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) लॉन्च हुई, तो भारत में गैस कनेक्शन की मांग में जबरदस्त उछाल आया. अचानक करोड़ों नए उपभोक्ताओं के जुड़ने से मौजूदा वितरण केंद्रों पर दबाव काफी बढ़ गया था. ग्रामीण क्षेत्रों में गैस एजेंसियों की संख्या कम होने के कारण शुरुआती दौर में रिफिल के लिए कतारें लगनी शुरू हो गई थीं.
- मोदी सरकार के दौरान कतारों का सबसे बड़ा कारण वैश्विक महामारी कोरोना रही. मार्च 2020 में जब देशभर में अचानक लॉकडाउन लगा, तो गैस की सप्लाई और डिलीवरी चेन बुरी तरह चरमरा गई थी. हालांकि गैस को जरूरी सेवा में रखा गया था, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कतों और कर्मचारियों की कमी की वजह से बुकिंग में हफ्तों की देरी हुई थी. उस समय कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखी गई थी.
- साल 2023 के मध्य में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, तब भी भारत में पैनिक बुकिंग देखी गई थी. घरेलू बाजार में सिलेंडर के दाम 1100 रुपये के पार पहुंचने की आशंका में लोगों ने समय से पहले रिफिल बुक करने की होड़ लगा दी थी.
- मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जब पहल (PAHAL-DBT) स्कीम के तहत आधार कार्ड को गैस कनेक्शन से जोड़ना अनिवार्य किया गया, तब भी एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ी थी. हालांकि ये कतारें गैस की कमी की वजह से नहीं, बल्कि केवाईसी (KYC) अपडेट कराने और फर्जी कनेक्शन हटवाने के लिए थीं. इसी कड़ाई के कारण सरकार ने करोड़ों नकली कनेक्शनों को सिस्टम से बाहर किया था, जिससे असली उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिलना आसान हुआ.